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Human body · Az-Zumar 39:42

नींद या मौत? सोते वक़्त हमारे साथ असल में क्या होता है

नींद के मरहले, गहरी नींद, REM, रात को दिमाग़ की सफ़ाई और 24 घंटे न सोने का असर, और क़ुरआन नींद को 'छोटी मौत' क्यों कहता है (39:42)।

लेखक Arsalan Ahmed Shaikh · आख़िरी अपडेट 2 Nov 2026 · 2 मिनट का पाठ

आयत

ٱللَّهُ يَتَوَفَّى ٱلْأَنفُسَ حِينَ مَوْتِهَا وَٱلَّتِى لَمْ تَمُتْ فِى مَنَامِهَا ۖ فَيُمْسِكُ ٱلَّتِى قَضَىٰ عَلَيْهَا ٱلْمَوْتَ وَيُرْسِلُ ٱلْأُخْرَىٰٓ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ ﴿42﴾

अल्लाह ही रूहों को उनकी मौत के वक़्त क़ब्ज़ करता है, और जो नहीं मरीं उन्हें उनकी नींद में। फिर जिस पर मौत का फ़ैसला कर दिया उसे रोक लेता है और बाक़ी को एक मुक़र्रर मुद्दत तक वापस भेज देता है।
Quran 39:42

हम अपनी ज़िंदगी का लगभग एक तिहाई हिस्सा सोकर गुज़ारते हैं, मगर कम ही सोचते हैं कि उन घंटों में क्या होता है। क़ुरआन नींद को रूह का क़ब्ज़ होना कहता है (39:42), और साइंस ने पाया है कि सोता हुआ जिस्म वह काम करता है जो जागते में नहीं हो सकते।

1. नींद चक्रों में आती है

हर रात लगभग 90 मिनट के चार से छह चक्र होते हैं: हल्की नींद N1 और N2, गहरी नींद N3 और REM। गहरी नींद ज़्यादातर रात की शुरुआत में, और REM फ़ज्र के क़रीब लंबी होती है।

2. गहरी नींद

गहरी नींद में दिमाग़ 0.5 से 4 हर्ट्ज़ की धीमी 'डेल्टा लहरें' बनाता है। उस वक़्त किसी को जगाना सबसे मुश्किल होता है, और जिस्म की मरम्मत ज़्यादा होती है।

3. दिल, साँस और तापमान

नॉन-REM नींद में दिल और साँस धीमे हो जाते हैं। जिस्म का तापमान फ़ज्र से पहले के घंटों में सबसे कम होता है, यानी तहज्जुद और सहरी का वक़्त।

4. REM नींद और बेहरकत जिस्म

REM नींद में जिस्म की ज़्यादातर मांसपेशियाँ कुछ देर के लिए बेहरकत हो जाती हैं, सिर्फ़ आँखों और साँस की मांसपेशियाँ काम करती हैं। ज़्यादातर ख़्वाब इसी मरहले में आते हैं। वीडियो के सवाल का जवाब: बंद आँखें नींद में इसी REM की वजह से हरकत करती हैं।

5. रात को दिमाग़ की सफ़ाई

2013 में साइंस जर्नल में चूहों पर एक रिसर्च के मुताबिक़ दिमाग़ नींद में बीटा-एमिलॉइड जैसा कचरा जागने के मुक़ाबले कहीं तेज़ी से साफ़ करता है। नींद सिर्फ़ आराम नहीं, मरम्मत भी है।

6. 24 घंटे बिना नींद

नेचर जर्नल की एक रिसर्च के मुताबिक़ लगभग 24 घंटे जागने के बाद काम करने की क़ाबिलियत नशे की हालत जैसी गिर जाती है।

तो नींद या मौत?

क़ुरआन नींद को रूह का क़ब्ज़ होना बताता है, जिसे कोई आला नहीं नाप सकता। साइंस जिस्म को हर रात एक बिल्कुल अलग हालत में जाता देख सकती है, मगर रूह को नहीं। इसलिए हम इसे साइंसी सबूत नहीं कहते, ग़ौर-ओ-फ़िक्र कहते हैं: हर रात हम मौत जैसी हालत से गुज़रते हैं और हर सुबह अल्लाह हमें ज़िंदगी लौटाता है।

हवाले

  1. The Quran 39:42 and 6:60 (quran.com).
  2. Sahih al-Bukhari 6312 (sunnah.com).
  3. National Institute of Neurological Disorders and Stroke (NIH). Brain Basics: Understanding Sleep.
  4. Xie L. et al. (2013). Sleep drives metabolite clearance from the adult brain. Science 342(6156), 373–377.
  5. Dawson D., Reid K. (1997). Fatigue, alcohol and performance impairment. Nature 388, 235.

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