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Human body · Az-Zumar 39:42

आप हर रात मरते हैं: सूरह अज़-ज़ुमर 39:42 में नींद और रूह

सूरह अज़-ज़ुमर 39:42 और अल-अनआम 6:60 नींद को रूह का 'क़ब्ज़' किया जाना बताती हैं। आयतों का मतलब, सोने और जागने की मसनून दुआएँ, और साइंस क्या नाप सकती है और क्या नहीं।

लेखक Arsalan Ahmed Shaikh · आख़िरी अपडेट 2 Nov 2026 · 2 मिनट का पाठ

आयत

ٱللَّهُ يَتَوَفَّى ٱلْأَنفُسَ حِينَ مَوْتِهَا وَٱلَّتِى لَمْ تَمُتْ فِى مَنَامِهَا ۖ فَيُمْسِكُ ٱلَّتِى قَضَىٰ عَلَيْهَا ٱلْمَوْتَ وَيُرْسِلُ ٱلْأُخْرَىٰٓ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ ﴿42﴾

अल्लाह ही रूहों को उनकी मौत के वक़्त क़ब्ज़ करता है, और जो नहीं मरीं उन्हें उनकी नींद में। फिर जिस पर मौत का फ़ैसला कर दिया उसे रोक लेता है और बाक़ी को एक मुक़र्रर मुद्दत तक वापस भेज देता है। बेशक इसमें ग़ौर करने वालों के लिए निशानियाँ हैं।
Quran 39:42

हर रात करोड़ों लोग बिना सोचे आँखें बंद कर लेते हैं। मगर क़ुरआन नींद को ऐसे अल्फ़ाज़ में बयान करता है जो हमें रुकने पर मजबूर करते हैं: नींद रूह का एक तरह से क़ब्ज़ किया जाना है, मौत की एक छोटी मश्क़ जो हर रात होती है।

क़ुरआन क्या कहता है

सूरह अज़-ज़ुमर 39:42 में अल्लाह फ़रमाता है कि वह मौत के वक़्त रूहें क़ब्ज़ करता है, और जो नहीं मरे उनकी रूहें नींद में। फिर जिस पर मौत का फ़ैसला हो उसे रोक लेता है और बाक़ी को एक मुक़र्रर वक़्त तक लौटा देता है। सूरह अल-अनआम 6:60 में है: 'वही है जो रात को तुम्हारी रूहें क़ब्ज़ करता है और जानता है जो तुमने दिन में किया'। दोनों आयतों में लफ़्ज़ तवफ़्फ़ा है, वही लफ़्ज़ जो मौत के लिए आता है।

सोने और जागने की सुन्नत

नबी ﷺ ने यह हक़ीक़त दिन में दो बार याद रखना सिखाया। सोते वक़्त: 'बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व अह्या'। जागते वक़्त: 'अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अह्याना बअ्दा मा अमातना व इलैहिन नुशूर' (सहीह बुख़ारी 6312)। हर सुबह जागना गोया ज़िंदगी का नया तोहफ़ा है।

साइंस क्या नाप सकती है

नींद 'बंद हो जाना' नहीं है। रात में 90 मिनट के चार से छह चक्र होते हैं। गहरी नींद में दिमाग़ धीमी डेल्टा लहरें बनाता है, दिल और साँस धीमे हो जाते हैं, और REM नींद में ज़्यादातर मांसपेशियाँ कुछ देर के लिए बेहरकत हो जाती हैं। चूहों पर एक रिसर्च में दिमाग़ नींद के दौरान कचरा कहीं तेज़ी से साफ़ करता पाया गया।

ताल्लुक़ कहाँ रुकता है

क़ुरआन नींद को रूह का क़ब्ज़ होना बताता है, जो रूहानी हक़ीक़त है। साइंस जिस्म को नाप सकती है, रूह को नहीं। शुऊर कैसे बंद होकर वापस आता है, यह साइंस में अभी खुला सवाल है। इसलिए यह तदब्बुर है, साइंसी सबूत का दावा नहीं।

  • सोने और जागने की मसनून दुआ पढ़ें।
  • वुज़ू के साथ सोएँ और अपने मामलात दुरुस्त रखें।
  • हर सुबह एक और दिन मिलने पर अल्लाह का शुक्र अदा करें।

हवाले

  1. The Quran 39:42 and 6:60, Arabic text and Sahih International translation (quran.com).
  2. Sahih al-Bukhari 6312, supplications for sleeping and waking (sunnah.com).
  3. National Institute of Neurological Disorders and Stroke (NIH). Brain Basics: Understanding Sleep.
  4. Xie L., Kang H., Xu Q. et al. (2013). Sleep drives metabolite clearance from the adult brain. Science 342(6156), 373–377.

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